मैं उन्नीस से अधिक वर्षों से तमिलनाडु में रहता हूँ पिछले 21 वर्षों से देश में चारों ओर यात्राएं कर रहा हूँ. मुझे लगता है कि अपने दम पर रहने वाले किसी भी व्यक्ति को (बिना लाल बत्ती कि गाड़ी और आगे पीची कमांडो के) इस बात का अहसास होगा कि हमारे देश में सामाजिक ताने - बाने काफी कमजोर हैं. आज राज ठाकरे से लेकर शीला दीक्षित तक, लोग उत्तर भारतीयों / हिंदी वालों खास कर बिहारियों की गर्दन तलाशते रहते हैं. तमिलनाडु में हिंदी भाषी लोगों की हालत किसी से छिपी नहीं है. अकसर विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में छात्रों के बीच राज्यों के आधार पर झगड़े की मीडिया में रिपोर्ट आती रहती है.
आज टाइम्स ऑफ इंडिया, चेन्नई संस्करण में मुख पृष्ठ पर एक समाचार के शीर्षक का हिंदी अनुवाद है - "7 बिहारी छात्र आतंकी लिंक के लिए गिरफ्तार". मैं अंदर की कहानी के बारे में टिप्पणी नहीं करना चाहूँगा क्यूंकि मैं पुलिस या प्रेस को अपमानित नहीं होते देखना चाहता (गौर तलब है कि जिस व्यक्ति को वे गिरफ्तार करना चाहते थे वह भाग गया और वह दिल्ली से आया था!), लेकिन यह पूरी तरह (मुझे यकीन है कि पुलिस आम जनता को दी गयी जानकारी के मूल्य को समझते हैं) पुलिस और प्रेस द्वारा एक खराब प्रस्तुति और एक समयपूर्व प्रेस विज्ञप्ति है.
प्रस्तुति से, यह प्रतीत होता है कि पड़ोसियों ने परेशान होकर (बिहारी अपने अशिष्ट व्यवहार के लिए कुख्यात रहे हैं - एक बिहारी होने के कारण मैंने खुद अनुभव किया है) छात्रों खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है . . .
इसके अलावा, हम सब जानते हैं कि “बिहारी” कोई पहचान नहीं है, जैसे कोई धर्म या कबीले या जाति या भाषा नहीं है जिसे "बिहारी" कहा जाता है. ऐसी स्थिति में, ऐसे बदनाम खबर के लिए एक राज्य के नाम का उल्लेख सिर्फ लापरवाही है जो प्रेस में जिम्मवार पड़ पर आसीन व्यक्ति की अज्ञानता बतलाती है. यदि वे गिरफ्तार लोगों के नाम, पता छापते, तो बात और होती.
अतीत में मैंने “दो उत्तर भारतीयों ने यात्रा खराब की" जैसे शीर्षक में समाचार पढ़ा है जब दवा का उपयोग कर सहयात्रियों को लूटने की रिपोर्ट छापी थी (एक अन्य समाचार पत्र द्वारा), और मैं यह भी जानता है कि तमिलनाडु में ऐसी प्रस्तुति सड़क किनारे . . . चाय कि दुकानों पर . . . लोगों द्वारा पसंद की जाती है और चाव से चर्चा की जाती है और यह भी कि मेरी इस लेखन की वजह से बंद यह सब बंद नहीं होने वाला है क्यूंकि यह बिजनेस देता है. फिर भी आदतन, मैंने तमिलनाडु पुलिस (शिकायत संख्या: E11CHI609) तथा टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक को लिखा है और आप सबके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ.