साईबेरिया के ठंढे प्रदेश में अदालत अपने देश के संस्था को चौबीस घंटे का समय देती है यह तय करने के लिये कि चार हज़ार साल पुरानी दैवीय वाणी को आतंकवादी घोषित किया जाय या नहीं . . . यहाँ हमारे देश भारत में हमारे न्यायालय और अधिकारी सैंतीस सालों बाद भी यह फैसला नहीं कर पाते हैं कि इंसान का खून हुआ था या कि वह एक दुर्घटना में मारा गया था . . .
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