Friday, July 22, 2011

अछूत मानसिकता . . .

दलित शब्द किसने बनाया है? . . . कब से है यह समूह? . . . अछूत शब्द किस वेद/ पुराण/ उपनिषद/ पुष्तक में लिखा है? हह! वेद में क्या लिखा है? वेद का उपयोग क्या है? इसकी सीमा क्या है? कभी देखा है वेद को? हह!
जागे हैं! बधाई हो! अंगराई ले लीजिए . . . होश में आने का इन्तेज़ार रहेगा . . . और जब पूरी तरह बाहर आ जाईये तो हीं लोगों को बुलाईय, नहीं तो यत्र तत्र बिखरे कपड़ों में आपको पता नहीं कैसा लगता होगा हमें आपको वैसा देखना अच्छा नहीं लगता . . . कभी कभी इंसान जगने के तुरत बाद नंगा होता है . . .


तो फिर जागो, उठो और काम
करो . . . क्या करना है नहीं समझ में आता है तो आसपास देखो . . . जग गए हो तो देख सकते हो यार . . . नहीं देख सकते हो मतलब अभी और जगना है . . .


और बात संघर्ष की, किसे नहीं करना परता है? कुछ भी अच्छा करने के लिये, जहां से शुरू कर जहाँ जाना होता है उसके “हिसाब” से सबको करना परता है, चाहे वो किसी भी कुल में पैदा हुआ हो. इस नियम को समझ जाईये तभी शांति से आगे बढ़ सकते हैं जिंदगी में . . . नहीं तो यूं हीं सड़क/ नदी किनारे बैठ कर रोते/ शिकायत करते रहेंगे . . . हाँ कभी कभी किस्मत से किसी को कुछ मिल जाता है, लेकिन वह नियम नहीं होता है . . . लेकिन एक नियम जरुर है, समाज के निचले स्तर से हीं हमेशा समाज को बदलने वाला पैदा हुआ है . . . हिमालय के दक्षिण में पैदा हुए सभी के सभी महानायक बिना शको सुबहा के इस नियम के उदाहरण हैं . . .
इस नियम का पूरे संसार में एक मात्र अपवाद महात्मा बुद्ध थे! और कोई मिल जाए तो जरुर बतलाना . . .

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