मेरा भगवान
इन्ही पत्थरों में कहीं
छुपा है मेरा भगवान
मुझे मालूम है
वो न देखता है मेरी तरह
न बोलता है मेरी तरह
न सुनता है मेरी तरह
न दिखता है मेरी तरह
फिर मुझे यकीन है
इसी में कहीं बसता है वह
मेरी तरह
मुझे यकीन है
यहीं कहीं से
या, ऐसे हीं कहीं से
या, कहीं से
मुझे देखता है वह
क्यूंकि, वक्त – बेवक्त
अपने होने का अहसास दिलाता है वह
मेरे विज्ञान
या, वैज्ञानिक मित्रों की समझ से,
मेरी यह सोच,
यह विश्वास
यह धारणा
एक बीमारी, एक बेहोशी हो सकती है
पर, मुझे यकीन है
वह यहीं बसता है
क्यूंकि उसके इन अनेक रूपों में
जब मैं खो जाता हूँ
तो, सचमुच में मुझे दिखता है वह
और मुझे देखता है वही
सुनता है वह
और, कहता है वह
कि, हर जगह रहता है वह
इसीलिये मैं कहता हूँ
कि इन्हीं किन्हीं पत्थर के टुकड़ों में
बसता है वह!
जब किसी और को इन पत्थरों में भगवान नहीं दिखता
तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होता
मुझे अपने परिश्रम का अहसास होता है
क्यूंकि मुझे भी वह आसानी से नहीं दिखा है
जब मैंने अपने विचारों कि सारी गुत्थियां सुलझाकर
जीवन के सारे मार्ग को अन्धेरा
और बंद पाकर
अपने को उसके चरणों में समर्पित कर
अपने शरीर के एक - एक कण को
एक – एक आँख बना देखा
तो वह मेरी हर आँख में बैठा दिखा
जब अपने शरीर के एक – एक कण को
कान बना कर सुना
तो हर ध्वनी उसी कि लगी
और, वह ध्वनी हर ओर से आ रही थी
इसीलिये दृढता से कहता हूँ
कि इन पत्थरों में भी कहीं रहता है वह
कभी छुपता है वह
कभी दिखता है वह
कभी बोलता है वह
कभी सुनता है वह
और इसी तरह
अपने होने
न - होने का
भ्रम पैदा करता है वह
इसी भ्रम में हीं कहीं रहता है वह
उसके बनाए भ्रम में जब मैं खो जाता हूँ
तभी मुझे दिखता है वह
इस संसार में जब मैं खो जाता हूँ
तभी मुझे दिखता है वह
तब जरूर दिखता है वह
कभी ध्रुव तारा सा
तो कभी चाँद, कभी सूरज सा दिखता है वह
इसीलिये मैं कहता हूँ
यहीं कहीं रहता है वह
मुझे पूरा यकीन है
इन्हीं पत्थरों में कहीं रहता है वह!
इन पत्थरों में तो मेरा भगवान जरूर बसता है
क्यूंकि इन पत्थरों को मैंने अपने हाथों से सजाया है
संजोया है, संवारा है
इन पत्थरों को भगवान बनाया है
इसीलिये इसमें मेरा भगवान रहता है
जरुर रहता है
किसिस और का न सही
सिर्फ मेरा हीं भगवान रहता है
अकेले रहता है
वो मेरी सुनता भी है
और मुझे आवाज़ भी देता है
कभी देखता है, कभी दिखता भी है
वह मुझे दिखता है – इसमें संदेह हो सकता है
लेकिन वो मुझे देखता है – इसमें कोई संदेह नहीं
वह सुनाई देता है - इसमें संदेह हो सकता है
लेकिन वो मेरी सुनता है – इसमें कोई संदेह नहीं
मेरी सुनने और मुझे देखने का प्रमाण वह वक्त – बेवक्त देता रहता है
इसी लिये मैं कहता हूँ, इन्हीं किन्हीं पत्थरों में वह है
मेरा भगवान!
तुझे मानना है तो मान
नहीं तो तेरी मर्जी है नादान
हज़ारों सालों से आये समझाने वाले
सदियों से ढूंढ रहे हैं विज्ञान वाले
भगवान को पत्थर कहता है बदजुबान!
मैं कहता हूँ, इसी में है मेरा भगवान!